वीरान

shayari

सालों से वीरान पड़ा था…
तेरी इक हसी से आबाद हो गया हूँ मैं !!

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ठिकाना

shayari

मेरी तरह खोये खोये से लगते हैं ये भी
इन परिंदों का भी शायद कोई ठिकाना नहीं है !!

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