ऐसा क्या माँगा था मैंने

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ऐसा क्या माँगा था मैंने

जो वो कभी दे न सका….

लहराता हुआ समंदर देकर
दो बूंद बारिश
रोम रोम में बसा सकने की
इक छोटी सी ख्वाहिश
दिल के बदले दिल देने की
आँखों की साजिश

ऐसा क्या माँगा था मैंने

हर रात सोने से पहले
इक मुस्कराहट
अपना बना कर भी
खो देने की घबराहट
दूर हो कर भी तेरी जिंदगी में
मेरी ही जगमगाहट

ऐसा क्या माँगा था मैंने

कुछ चिठियाँ , तेरी खुशबू
से भरी हुई
कुछ नादंनियाँ, मेरी जिद्द
पर करी हुई
कुछ मंजिलें, मिल कर
साथ तेय करी हुई

ऐसा क्या माँगा था मैंने

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9 thoughts on “ऐसा क्या माँगा था मैंने

  1. bahut bahut khoob swatiji..was waiting for your nzm…
    कुछ चिठियाँ , तेरी खुशबू
    से भरी हुई
    कुछ नादंनियाँ, मेरी जिद्द
    पर करी हुई…..
    ..
    .ऐसा क्या माँगा था मैंने…..sab kuch to mang liya hein…!!!
    excellent…
    .

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