दुनिया वाले तो मौत का भी तमाशा बना लेते है

करते है इश्क जो वो हर ज़ख़्म उठा लेते है
बहते हुए पानी में भी आग लगा लेते है

करते नहीं शिकवा मोहब्बत में रुसवाई पे
ख्वाहिश-ए-यार में दुनिया भुला लेते है

उब जाता है जब दिल ज़माने की रिवायतो से
तो लेकर काग़ज़ कलम शायरी से दिल लगा लेते है

ना करना हमसे मुकाबला दिलों के खेल में
कहते है , हम बातों बातों में दिल में घर बना लेते है

गुज़ार देते है जुदाई उसकी, ग़ज़ल लिखते हुए
और विसाल में वही ग़ज़ल उसके आगे गुनगुना लेते है

हमसे माँ-बाबा ने कहा था कभी गम में भी रोना नहीं
और खुद हमे देख कर web-cam पे ख़ुशी में भी आंसू बहा लेते है

तुम करते हो गिला ज़रा सी हसी ठिठोली का
दुनिया वाले तो मौत का भी तमाशा बना लेते है

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9 thoughts on “दुनिया वाले तो मौत का भी तमाशा बना लेते है

  1. wah wah kya khoob hein…
    bestest hai
    हमसे माँ-बाबा ने कहा था कभी गम में भी रोना नहीं
    और खुद हमे देख कर web-cam पे ख़ुशी में भी आंसू बहा लेते है
    excellent….

  2. U’ve magic in ur hand…. Spellbounding are the words….
    marvellous indeed….!! 🙂
    hav read sm of ur earlier writings…. Liked dem as well…! 🙂

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