कब से युही स्तब्द खड़े है ये दरख्त

darakht

 

 

 

 

 

 

 

कब से युही स्तब्द खड़े है ये दरख्त

तुम ने आ कर देखा नही इन्हें कब से
गए तुम, तब से उदास पड़े है ये दरख़्त
कब से युही स्तब्द खड़े है ये दरख्त

किसी चिड़िया का बसेरा भी नही अब तो
मुद्दतों से खाली पड़े मकान की तरह उजड़े है ये दरख़्त
कब से युही स्तब्द खड़े है ये दरख्त

लगता है किसी जिद्द में सब से खफा से है
किसी बच्चे की तरह जिद्द पे अड़े है ये दरख्त
कब से युही स्तब्द खड़े है ये दरख्त

तेरे मेरे बचपन की कितनी यादें इनके पास महफूज़ है
इसलिए तो इस मुफलिसी के दौर में भी मेरे करीब बड़े है ये दरख्त
कब से युही स्तब्द खड़े है ये दरख्त

signature

Advertisements

4 thoughts on “कब से युही स्तब्द खड़े है ये दरख्त

  1. beautiful….behtareen.
    तेरे मेरे बचपन की कितनी यादें इनके पास महफूज़ है
    इसलिए तो इस मुफलिसी के दौर में भी मेरे करीब बड़े है ये दरख्त

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s