ऊपर वाले ने ये जहां क्यूँ बनाया

god

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कभी सोचा है, ऊपर वाले ने ये जहां क्यूँ बनाया
मुझे हिन्दू , उसको मुस्लमान क्यूँ बनाया

दिल बनाया तो बनाया उस खुदा ने पर
इस दिल में मोहब्बत का अरमान क्यूँ बनाया

हो कर आज लाचार इस मजहबी फर्क से, इस वेह्शत से
सोचती हूँ खुदा ने मुझे इंसान क्यूँ बनाया

क्यूँ इस बुजदिली के दौर में ये दिल दिया मुझको
मेरे ख्यालों को लफ्ज़ दिए तो मुझे बेजुबान क्यूँ बनाया

जब एक है खुद खुदा , वो इस जहाँ को बनाने वाला
उसके बनाये बन्दे इस सच से अनजान क्यूँ है

करता है मुहोब्बत भी, नफरत भी , बगावत भी
इस दिल-ए-नादां को तूने बदगुमान क्यूँ बनाया

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5 thoughts on “ऊपर वाले ने ये जहां क्यूँ बनाया

  1. bahut bahut khoob swati ji..
    मेरे ख्यालों को लफ्ज़ दिए तो मुझे बेजुबान क्यूँ बनाया…
    ye lines to dil ko chhu gayi…

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