सोच रही हूँ के क्या लिखूं !!

 

 

 

 

 

 

सोच रही हूँ के आज  क्या लिखूं !!

सुबह के लिए आफ़ताब
शब् के लिए महताब लिखूं
किसी प्यासे समंदर की लिए
मोहबत-ऐ-आब लिखू !!

तेरे चेहरे पे रंग-ओ-मसर्रत की महक
कानों में लटकते झुमकों की चहक
दिल के आराम के लिए फुर्सत के पल
आखोँ के लिए नज़्म-ऐ-ख्वाब लिखूं !!

ईद के रोज़ भूखे बच्चों के लिए मिठाई
जान से जाते किसी बीमार के लिए दुआ और दवाई
बेरंग ज़िन्दगी के लिए रंगों की महफ़िल
दिवाली पे किसी सुने आँगन के लिए तब-ओ-ताब लिखूं !!

रेगिस्तान की तपती हुई मिटटी में दफ़न
कई अरमान, कई ख्वाब , कई तसवुर-ऐ-जेहन
कहीं लिख दूँ न वही आग, वही रक्स , वही अदा
किसी दुल्हन के लिए जैसे चांदनी सा शबाब लिखूं !!

वक़्त के दौर में सब लुटा चुके किसी बुज़ुर्ग की ख़ातिर
घुट घुट के जी रही किसी अकेली माँ की ख़ातिर
और उनकी ख़ातिर जो हमारी ख़ातिर सरहद पे बैठे है
सफाह-ऐ-ज़िन्दगी पे बचपन की कोई मुराद लिखूं !!

लिखूं अगर तो कुछ ऐसा के जो दिलों को छु जाये
आँखों में जिससे आंसू , लबों पे मुस्कान आये
तीर सी निकले और सीधे दिल पे लगे
ऐसे कुछ लफ्ज़ लिखू, ऐसे ख्यालात लिखूं !!

सोच रही हूँ के आज  क्या लिखूं !!

मसर्रत : Happiness

नज़्म-ऐ-ख्वाब : Song of dreams

तब-ओ-ताब : Luster and glow

तसवुर-ऐ-जेहन : Imagination of mind

मुराद : Wish

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4 thoughts on “सोच रही हूँ के क्या लिखूं !!

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