नूर -ऐ -खुदा

माँ !!!

कुदरत की लिखी हुई कविता सी हो तुम

किसी सुहागन के माथे की बिंदिया सी हो तुम

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कभी लगती हो इब्तदा -ऐ -इश्क जैसी

कभी आँगन में खेलती गुडिया सी हो तुम

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मै करती हु फक्र के मेरे पास हो तुम

मेरे लिए तो किसी फकीर की दुआ सी हो तुम

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इस दुनिया के बेरहम रेगिस्तान में

किसी प्यासे के लिए गंगा सी हो तुम

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कर देती हो अपनी मुस्कराहट से रौशनी

शबनम भी हो और शमा भी हो तुम

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कैसे करू  बयान के क्या हो

मेरे  लिए  नूर -ऐ -खुदा सी हो तुम

माँ !!!

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21 thoughts on “नूर -ऐ -खुदा

  1. One of the best poem i have read n probably the best compilation about mothers attributes in so simple lines!!! really xtremly immpressive. Gud work keep going 🙂

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