हुनर

christmas-lights

जुहराह-ए-रूह-ओ-नज़र अभी बाकी है
सब्ज़ा-ए-दिल-ए-शजर अभी बाकी है!
अभी भी है चर्चा हमारा कूचा-ए-रक़ीब में
लगता है इस कलम में हुनर अभी बाकी है!!

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जुहराह-ए-रूह-ओ-नज़र – Brightness of soul and eyes
सब्ज़ा-ए-दिल-ए-शजर – Greenery in tree of heart
चर्चा – Discussion
कूचा-ए-रक़ीब – One’s rival’s lane
हुनर – Skill/Talent

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पत्थरों की किस्मत

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इन पत्थरों की किस्मत भी कितनी बेरहम है
ना ये बोल सकते हैं और ना ही इस वीराने को छोड़ कर जा सकते हैं

शायद ये सब मोहब्बत का गुनाह करने वाले कोई आशिक़ हैं
जिन्हे किसी प्यार के दुश्मन जादूगर ने पत्थर बना दिया

पर फिर भी…
वो इनकी मोहब्बत को ना मिटा सका तो
इनको ईमारत में चुनवा दिया

इसलिए ही शायद, ये इत्मीनान से युही दिन रात एक-दूसरे को देखते रहते हैं
और प्यार करने वालों के नाम अपने सीने पर खुदने का दर्द चुपचाप सहते रहते हैं

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